होलीका
प्रिय पाठको आप को आगामी होली व इसके बीच आने वाली महत्वपूर्ण दिनों के बारे में आज हम आप को बताने जा रहे हे | कृपया इस लेख का अध्यन जजूर करे |
6 मार्च
आंवला एकादशी
फाल्गुन शुक्ल एकादशी आमला एकादशी या आमलकी एकादशी कहलाती हे | आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमाह के समक्ष आमलकी एकादशी का संकल्प करें| भगवान की पूजा के पश्चात् पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें| सबसे पहले वृक्ष की चारो ओर की जमीन को साफ करें और उसको गाय के गोबर से पवित्र करे| पेड़ की जड़ मैं वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें| इस कलश के साथ भगवान परशुरामजी का यथाविधि पूजन करें| रात्रि मैं जागरण करके दसरे दिन पारण करें | आंवला को शास्त्र में श्रेष्ट स्थान प्राप्त हैं| आंवले को भगवान विष्णु ने आदिवृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया हैं|
9 मार्च
होलिका दहन
होलिका दहन फाल्गुन मास की प्रदोष व्यापिनी को किया जाता हे| होलिका दहन सायंकाल 6:28 से 6:40 बजे के बिच किया जाता हे| इस दिन हिरण्यकश्यपु नमक एक बहुत ही घमंडी राजा ने अपनी बहन होलिका के माध्यम से विष्णु भगवान के परम भक्त प्रहलद को जलती हुई अग्नि मैं जलने का प्रयास किया था | होलिका तो जल गई परन्तु भगवन विष्णु की कृपा से प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ| होलिका का दहन बुराई का दहन हैं| होलिका दहन के दिन महिलाये होलिका के चारो कोनो पर जल डालती हे| इसक बाद पूजा करती हे फिर होली के चारो ओर परिक्रमा करती हे | होली दहन के सामय हल्दी और सूत की मोली को भी होली के दर्शन करवाए जाते हे|
10 मार्च
धुलंडी
होली के दूसरे दिन धुलंडी का त्यौहार भी मनाया जाता हे| यह दिन रंग, गुलाल, फूलो एवं गायन-वादन और धमाल आदि से मनाया जाता हे|
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